वो निडर बे-सिपर गया होगा
या'नी अब तक वो मर गया होगा
ज़हर जो अब उतर गया होगा
वो कलेजा कुतर गया होगा
जिस ने मेरा हर एक ज़ख़्म सिया
मेरे ख़ूॅं में वो तर गया होगा
कई तूफ़ान चीरने के बा'द
वो परिंदा ठहर गया होगा
होंठ से ख़ूॅं निकल ही जाता पर
आज जी उस का भर गया होगा
अम्र तो दो जहाॅं का बासी था
दो जहाॅं में बिखर गया होगा
— Yusha Abbas 'Amr'















