कभी तुम्हारी अदाओं ने फिर कभी सदाओं ने मार डाला
कभी लबों पर फ़ना हुए हम कभी निगाहों ने मार डाला
मुझे यक़ीं था रहेंगे हरदम मेरे ही पहलू में यार मेरे
मगर हुआ यूँ कि मुश्किलों में अज़ीज़ यारों ने मार डाला
उस लड़के की बाँहों में वो लड़की देख रहे हो ना
उसको बाहों में लेकर इक बार बहुत रोया था मैं
डर मुझे मेरी मुहब्बत एक दिन खो जाएगी
यार मुझको लग रहा वो ग़ैर की हो जाएगी
मैं सभी वादे पुराने ही निभाते जाऊँगा
और वो जाकर किसी की बाँह में सो जाएगी
जुर्म में शामिल रहेंगे खिड़कियाँ, दीवार, छत
और फिर औरत की अस्मत कुंडियाँ ले जाएंगी
जीवन भी मिट्टी का एक खिलौना है
इक दिन तो सबको ही रुख़सत होना है
आज बिता लो हँसते गाते तुम यारों
किसने जाना कल को क्या-क्या होना है
डगर मुश्किल मगर है हौसले पुरज़ोर सीने में
रगों में रक्त है उबला मचा है शोर सीने में
सफ़र में मुश्किलें क्या ख़ाक रोकेगी मेरा रस्ता
नज़र में मंज़िलें और आग है घनघोर सीने में
रात भर तुम तो सुकूँ की नींद में सोते रहे
पर सुकूँ की धज्जियाँ मैंने उड़ाईं रात भर
लोग कहते है कि ज़हर होता है इश्क़
फिर भी हमें हर पहर होता है इश्क़
हमें इश्क़ खुदा की इबादत लगती है कभी
कभी लगा, खुदा का कहर होता है इश्क़