काम अच्छा तो कर गया हूँ मैंक्यूँ नज़र से उतर गया हूँ मैंउस को अहसास हो मेरे दुख काकर के वा'दा मुकर गया हूँ मैंकोई मुझ को समेट ले आ करज़र्रा-ज़र्रा बिखर गया हूँ मैंरोज़े महशर हो क्या ख़ुदा जानेजो न करना था कर गया हूँ मैंचढ़ के सर बोलते हैं तिनके भीजब से यारों सुधर गया हूँ मैं— Raza sahil