Gaurav Singh

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    ऐसा न हो कि प्यार का मज़मून भाँप कर
    ख़त खोलिए तो उसमें उदासी के अक्स हों
    Gaurav Singh
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    पलट कर लौट आने में मज़ा भी है मुहब्बत भी
    बुलाकर देख लो शायद पलट कर लौट आएँ हम
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    उदासी चल कहीं चलते हैं दोनों
    पिएँगे चाय और बातें करेंगे
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    जो रब ने चाहा तो देख लेना कि हम अचानक कहीं मिलेंगे
    कहाँ लिखा है मिलेंगे हम तुम कहाँ लिखा है नहीं मिलेंगे

    हमारे ख़त का जवाब देना सही समझना तो ख़त में लिखना
    जहाँ पे हम तुम बिछड़ गए थे पलट के आना वहीं मिलेंगे

    ख़ुदा की दुनिया यहाँ भी है औ ख़ुदा की दुनिया वहाँ भी है ना
    ख़ुदा की मर्जी अगर हुई तो इसी जनम मे यहीं मिलेंगे

    सँभाल रख्खी है तेरी फ़ोटो जो मैंने हिजरत में तुझसे माँगी
    वो जिसके पीछे लिखा था तुमने करो भरोसा कहीं मिलेंगे

    लिखे हुए का करें भरोसा या मन की सुन के करें मोहब्बत
    जहाँ लिखा है मिलेंगे हम तुम, वहीं लिखा है नहीं मिलेंगे
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    Gaurav Singh
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    तुम्हारा पहलू तुम्हारी मर्जी जिसे भी चाहो बिठाओ इसमें
    मगर मेरी जाँ हमारे दिल का हुआ तमाशा तो याद रखना
    Gaurav Singh
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    हवा से उल्टा चलेंगे हरदम नदी की धारा नहीं बनेंगे
    अगर बने तो बनेंगे सागर मगर किनारा नहीं बनेंगे
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    क्या विवशता थी वो सोचो क्या समय आया था वो भी
    राम जी सीता से बोले आग पर चलना पड़ेगा
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    बहुत मसरूफ थी ना तुम किसी लड़के के चक्कर में
    अभी मैं बन गया शायर तो मेरी याद आती है
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    कभी कभी तो जी करता है आग लगा दूं दुनिया को
    कभी कभी दुनिया को जलते देख के रोने लगता हूं
    Gaurav Singh
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    हर किसी से दिल लगाने की मेरी फितरत नहीं पर
    अब कोई दर से हमारे प्यासे जाए ठीक है क्या
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