हम को थोड़ा वक़्त दे ज़िन्दगी
हम भी तेरे साथ चलना चाहते हैं
जैसे निकलते हैं चाँद और सूरज
हम भी वैसे ही निकलना चाहते हैं
बदलते ही रूत बदलता है मौसम
हम भी वैसे ही बदलना चाहते हैं
सँभल जाती है धरती इतने बोझ के बा'द
हम भी वैसे ही सँभलना चाहते हैं
मिल ही जाता है दरिया समुंदर से
हम भी तुझ से वैसे ही मिलना चाहते हैं
— Kumar Rishi















