बात कुछ इस तरह कही जाए
    दूर तक फिर वो गूंजती जाए

    फ़ैसला हो ज़रूर हो साहब
    बात सबकी मगर सुनी जाए

    जिस तरह से चला गया है तू
    काश ये याद भी चली जाए
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    Manish Kumar Gupta
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    अश्क आँखों मे ला नहीं सकते
    ज़ख़्म तुम को दिखा नहीं सकते

    दर्द इतना मिला मोहब्बत में
    यार अब दिल लगा नहीं सकते
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    Manish Kumar Gupta
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    ख़ुदा हिस्सों में किसने बाँटी ज़मीं
    तू महदूद कर दे सरकती ज़मीं

    ज़मीं इश्क़ करती है महताब से
    अमावस की शब में तड़पती ज़मीं

    कभी चाँद मिलने को आता है पास
    कभी चाँद के पास जाती ज़मीं

    नहीं सोचता कोई उनके लिए
    किसानों को बहला के लूटी ज़मीं

    बहुत ऊँची है ये इमारत सुनो
    खड़ी है जहाँ पे है किसकी ज़मीं

    ज़मीं दिल की जबसे हुई रेगज़ार
    बहारों के बिन अब मचलती ज़मीं

    सनम बेवफ़ाई का है ये सबब
    हिला दी है तुमने तो मेरी ज़मीं
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    Manish Kumar Gupta
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    काम पूरा कर रही है मौत तो
    काम आधा कर रही है ज़िंदगी
    Manish Kumar Gupta
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    जिसे मैं चाहता हूँ ग़लती से आज
    क़यामत हो अगर वो कॉल कर ले
    Manish Kumar Gupta
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    नहीं अच्छा कि कोई ट्रॉल कर ले
    मुझे तू ट्वीट मत कर कॉल कर ले
    Manish Kumar Gupta
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    तेरी दुनिया से कैसे दूर जाऊँ
    मुहब्बत रास्ते में पड़ रही है
    Manish Kumar Gupta
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    जब ज़ीस्त में फिसल गए
    अपने सभी बदल गए

    बनकर हकीम आए जो
    ज़ख़्मों को और मसल गए

    मारा सभी ने पहले तो
    आख़िर में फिर कुचल गए

    कर चीख़ अनसुनी मेरी
    चुपके से सब निकल गए

    क़िस्सा मनीष सुन यहाँ
    सब मुर्दे तक दहल गए
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    Manish Kumar Gupta
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    बुरे दिन चल रहे है मेरे शायद
    बिना ही बात दुनिया अड़ रही है
    Manish Kumar Gupta
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    बमुश्किल जीत पाऊँगा मैं ये जंग
    मेरी तक़दीर मुझसे लड़ रही है
    Manish Kumar Gupta
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