मैं समझ ही गया कि मेरा ग़म
    तुझको अब जाँ समझ नहीं आता
    Brajnabh Pandey
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    मैं वो सफ़र हूँ जो मुकम्मल ही नहीं
    वो शख़्स आख़िर छोड़ जायेगा मुझे
    Brajnabh Pandey
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    वस्ल की रात तो ख़ूब की गुफ़्तुगू
    सुब्ह देखा सुनहरा सा इक ख़्वाब था
    Brajnabh Pandey
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    जान क्यूँ तू मुझको घायल कर रहा है
    दिल भी मुझसे यार दंगल कर रहा है

    क्या बताऊँ खलबली दिल में मची है
    मुझको तेरा हुस्न पागल कर रहा है

    ज़िंदगी मेरी तो बंजर हो गई है
    पर ये तेरा प्यार बादल कर रहा है

    दश्त का माहौल सा था तू जो बिछड़ा
    फिर तू आ कर मुझ को जंगल कर रहा है
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    Brajnabh Pandey
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    कभी तो यार मेरी ग़ज़लों का पूछा करो मतलब
    मुझे मालूम है जाँ तुम ग़ज़ल कितनी समझती हो
    Brajnabh Pandey
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    उसको समझने में बड़े मन से जुटा हूँ यार मैं
    मैं हूँ वही जो आज तक समझा नहीं ख़ुद को कभी
    Brajnabh Pandey
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    सोच में बैठे हैं तेरी इक सदी से यार हम
    मौत आख़िर यार कब फुरक़त में तेरे आएगी
    Brajnabh Pandey
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    अगर जो ज़माने में हर चीज़ बिकती
    दे क़ीमत हमारी क़ज़ा माँगते हम
    Brajnabh Pandey
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    जो कभी तुम भूले भटके पढ़ लो मेरे शेर जानाँ
    यार धोखे में उसे तुम आइना मत जान लेना
    Brajnabh Pandey
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    उजालों में नहीं आया करो तुम रात में जानाँ
    हक़ीक़त छोड दो आया करो तुम ख़्वाब में जानाँ
    Brajnabh Pandey
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