जान क्यूँँ तू मुझ को घाइल कर रहा है

दिल भी मुझ से यार दंगल कर रहा है

क्या बताऊँ खलबली दिल में मची है
मुझ को तेरा हुस्न पागल कर रहा है

ज़िंदगी मेरी तो बंजर हो गई है
पर ये तेरा प्यार बादल कर रहा है

दश्त का माहौल सा था तू जो बिछड़ा
फिर तू आ कर मुझ को जंगल कर रहा है

— Brajnabh Pandey

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Husn Shayari

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