vasl ki raat to khoob ki guftugoo | वस्ल की रात तो ख़ूब की गुफ़्तुगू

  - Brajnabh Pandey

वस्ल की रात तो ख़ूब की गुफ़्तुगू
सुब्ह देखा सुनहरा सा इक ख़्वाब था

  - Brajnabh Pandey

Neend Shayari

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    मुझको तेरा हुस्न पागल कर रहा है

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