बोलकर के गया था वो जाते हुए
अच्छा लगता हूँ मैं मुस्कुराते हुए
छोड़ आया हूँ ख़ुशियाँ में जिसके लिए
हँस रहा है वो मुझको रुलाते हुए
हो मयस्सर मुझे रोटी दो वक़्त की
मैं बहुत थक चुका हूँ कमाते हुए
घाव जो दिख रहे हैं मेरे गालों पर
हो गए रोज़ आँसू बहाते हुए
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