हाथ थामा जो ग़ैरों का तुमने सनम
    मेरे एहसास की याद आनी मगर

    भूल जाओगे तुम कैसे भूलेंगे हम
    जिस से गुज़रे कभी वो सुहानी डगर
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    Jitendra "jeet"
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    बोलकर के गया था वो जाते हुए
    अच्छा लगता हूँ मैं मुस्कुराते हुए

    छोड़ आया हूँ ख़ुशियाँ में जिसके लिए
    हँस रहा है वो मुझको रुलाते हुए

    हो मयस्सर मुझे रोटी दो वक़्त की
    मैं बहुत थक चुका हूँ कमाते हुए

    घाव जो दिख रहे हैं मेरे गालों पर
    हो गए रोज़ आँसू बहाते हुए
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    Jitendra "jeet"
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    इक लड़की मेरे ख़्वाबों में आया करती थी
    मुर्शिद इक लड़की के ख़्वाब हुआ करते थे हम
    Jitendra "jeet"
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    थककर हम भी इक दिन प्यार भुला बैठे
    अब महफ़िल में यार कमाने आए हैं
    Jitendra "jeet"
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    वो जब मिलता तो हम पागल हो जाते हैं
    उसकी नज़रों से हम घायल हो जाते हैं
    Jitendra "jeet"
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    क्या ज़रूरत पड़ी हिज्र की ऐ ख़ुदा
    मौत काफ़ी नहीं दिल्लगी के लिए
    Jitendra "jeet"
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    चुराकर मिरा दिल तुम्हें क्या मिलेगा
    बची पास कोई निशानी नहीं है
    Jitendra "jeet"
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    उसने भी तोड़ा होता गर दिल मेरा
    तो फिर घर जाके मर जाना था मुझको
    Jitendra "jeet"
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    सोचो वो कैसे जीते होंगे जिनके
    आशिक़ उनकी बाँहों में मर जाते हैं
    Jitendra "jeet"
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    तुम मिटा तो रहे हो निशाँ प्यार के
    नाम दिल पर लिखा है मिटेगा नहीं
    Jitendra "jeet"
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