अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ

और किसी को मत देना धोखा जानाँ

जब आँखों को दरिया करने का मन हो
तब मेरी रूदाद-ए-ग़म सुनना जानाँ

दिन से रात तलक मैं तुम को रोता हूँ
तुम भी मुझ को आठ-पहर रोना जानाँ

अपने हाथ के कंगन जा पर रखना तुम
वाँ पर मेरी ग़ज़लें मत रखना जानाँ

तुम रिश्तों में मत ढूँडो ख़ुशियाँ सारी
सीखो ख़ुद से मिल कर ख़ुश होना जानाँ

आज जला दी वो वाली फ़ोटो जिस
में
सूट तुम्हारे जिस्म पे था काला जानाँ

तुम से पहले मैं ख़ुश रहता था लेकिन
बा'द तुम्हारे रंज-ओ-ग़म रहता जानाँ

चार महीने खेल के दिल को तोड़ दिया
मेरा दिल क्या एक खिलौना था जानाँ?

हाए! तुम्हारे लब को देख के लगता है
तुम ने 'मीत' का ख़ून पिया होगा जानाँ

— रूपम कुमार 'मीत'

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