आख़िरी है ये जाम मत पूछो

कैसे गुज़रेगी शाम मत पूछो

मैं तो ग़म बेचने ही आया हूँ
न ख़रीदो तो दाम मत पूछो

आज बिखरा पड़ा है राहों में
हालत-ए-दिल तमाम मत पूछो

बचपना भी अलग सा था मेरा
कैसे तोड़े थे आम मत पूछो

इस धधकते हुए से सीने में
कौन है बेलगाम मत पूछो

लौट कर आ रहे हैं वापस क्यूँ
कोई तो होगा काम मत पूछो

तुम से गर हो सके तो प्यास बुझाओ
कितने हैं तिश्ना काम मत पूछो

जिस से है इश्क़ मुझ को तुम ही हो
यार अब तुम तो नाम मत पूछो

आज कल वो हमें नहीं मिलता
कब किया था सलाम मत पूछो

— Atul Kumar

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