अपने शिकवों को पाल कर बैठा
वस्ल के दिन मलाल कर बैठा
अपनी हालत सुधर न पाई तो
मैं ख़ुदा से सवाल कर बैठा
अब मेरा दिल भी मुझ से कहता है
यार तू भी कमाल कर बैठा
इक मकाँ तोड़ के मिरे अंदर
काम तू बेमिसाल कर बैठा
तू बता तू तो जानता है सब
क्यूँ मैं ख़ुद का ये हाल कर बैठा
— Atul Kumar















