बात करते नहीं हैं हम लेकिन
इश्क़ अब भी नहीं है कम लेकिन
साथ जीना कहाँ मुयस्सर है
फिर भी कोशिश करेंगे हम लेकिन
वो समझता है मर गया हूँ मैं
मुझ में बाकी है अब भी दम लेकिन
अब मुहब्बत मुझे डराती है
चाहता हूँ मैं इक सनम लेकिन
तेरी यादों से दूर जाता हूँ
पीछा करता है तेरा ग़म लेकिन
और कितना तुझे पुकारूँ मैं
आख़िरी हो मिरा जनम लेकिन
तेरी चाहत के मेरा दम निकले
मेरे मौला का है करम लेकिन
सामने है ये मय-कदा मेरे
फिर भी पीना पड़ेगा ग़म लेकिन
— Atul Kumar















