Abbas Dana

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@abbas-dana

Abbas Dana shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Abbas Dana's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तुम्हारा नाम लिया था कभी मोहब्बत से मिठास उस की अभी तक मेरी ज़बान में है — Abbas Dana

Ghazal

गर्दिश-ए-दौराँ से इक लम्हा चुराने के लिए सोचना पड़ता है कितना मुस्कुराने के लिए कितनी ज़हमत झेलता है एक मुफ़्लिस मेज़बान घर की बद-हाली को मेहमाँ से छुपाने के लिए भूक उन को ले गई है कार-ख़ानों की तरफ़ घर से बच्चे निकले थे स्कूल जाने के लिए ख़ून अपना बेच कर आया है इक मजबूर बाप बेटियों के हाथ पर मेहंदी लगाने के लिए ज़िंदगी जलती है कितनी दोज़ख़ों की आग में चार-दीवारों की इक जन्नत बनाने के लिए हाए त्यौहारों ने लोगों को भिकारी कर दिया क़र्ज़ लेना पड़ता है ख़ुशियाँ मनाने के लिए हो रहे हैं आज 'दाना' आँधियों में मशवरे सिर्फ़ मेरे घर का इक दीपक बुझाने के लिए — Abbas Dana
दिल लगाया है तो नफ़रत भी नहीं कर सकते अब तिरे शहर से हिजरत भी नहीं कर सकते आख़िरी वक़्त में जीने का सहारा है यही तेरी यादों से बग़ावत भी नहीं कर सकते झूट बोले तो जहाँ ने हमें फ़नकारी कहा अब तो सच कहने की हिम्मत भी नहीं कर सकते इस नए दौर ने माँ-बाप का हक़ छीन लिया अपने बच्चों को नसीहत भी नहीं कर सकते हम उजालों के पयम्बर तो नहीं हैं लेकिन क्या चराग़ों की हिफ़ाज़त भी नहीं कर सकते क़द्र इंसान की घट घट के यहाँ तक पहुँची अब तो क़ीमत में रिआ'यत भी नहीं कर सकते फ़न की ताज़ीम में मर जाओगे भूके 'दाना' तुम तो ग़ज़लों की तिजारत भी नहीं कर सकते — Abbas Dana