dil lagaaya hai to nafrat bhi nahin kar sakte | दिल लगाया है तो नफ़रत भी नहीं कर सकते

  - Abbas Dana

दिल लगाया है तो नफ़रत भी नहीं कर सकते
अब तिरे शहरस हिजरत भी नहीं कर सकते

आख़री वक़्त में जीने का सहारा है यही
तेरी यादों से बग़ावत भी नहीं कर सकते

झूट बोले तो जहाँ ने हमें फ़नकारी कहा
अब तो सच कहने की हिम्मत भी नहीं कर सकते

इस नए दौर ने माँ-बाप का हक़ छीन लिया
अपने बच्चों को नसीहत भी नहीं कर सकते

हम उजालों के पयम्बर तो नहीं हैं लेकिन
क्या चराग़ों की हिफ़ाज़त भी नहीं कर सकते

क़द्र इंसान की घट घट के यहाँ तक पहुँची
अब तो क़ीमत में रिआ'यत भी नहीं कर सकते

फ़न की ताज़ीम में मर जाओगे भूके 'दाना'
तुम तो ग़ज़लों की तिजारत भी नहीं कर सकते

  - Abbas Dana

Child labour Shayari

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