चाँद-सा अपना मुखड़ा दिखा दीजिए
रुख़ से पर्दा ज़रा-सा हटा दीजिए
रुख़ से पर्दा ज़रा-सा हटा दीजिए
मेरी चाहत पे बेहद खफ़ा हैं मगर
मेरे जज़्बों का कुछ तो सिला दीजिए
ले के उम्मीद आया हूँ दर आप के
जाम-ए-वहदत नज़र से पिला दीजिए
फ़र्क ज़र्रा बराबर न रह पाए अब
फ़ासला आज हर इक मिटा दीजिए
ज़िंदगी भर दिलों में महकते रहें
प्यार के फूल ‘रोहित’ खिला दीजिए
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मुहब्बत में मुझे भी अब पता ये चल गया यारों
कि मिल कर के बिछड़ना इश्क़ का दस्तूर होता है
कि मिल कर के बिछड़ना इश्क़ का दस्तूर होता है
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चलेगा तू नहीं बनकर हमारे साथ हमराही
बनेगा फिर मुक़म्मल ज़िंदगी का ये सफ़र कैसे
बनेगा फिर मुक़म्मल ज़िंदगी का ये सफ़र कैसे
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मैं बेक़रार बहुत था उन्हीं से मिलने को
जब आए पास मेरे वो तो फिर ख़ुशी आई
हमें तो हँसते हुए भी निकल पड़े आँसू
कभी-कभी तो रुलाई में भी हँसी आई
भले न बात रही वो जो बात पहले थी
दुआ सलाम में फिर भी नहीं कमी आई
दिलों की बात जो नग़्मों में कर रहे ‘रोहित’
ख़याल-ए-यार में शायद सुख़नवरी आई
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प्रेम जाने का प्रभु तक द्वार है
प्रेम ही सारे जगत का सार है
प्रेम ही सारे जगत का सार है
चर-अचर जो दिख रहे चारों तरफ़
प्रेम का विस्तार ही संसार है
जोड़ने का काम ही करता सदा
प्रेम का होता यही किरदार है
प्रेम का प्रतिबिंब ही है ये भुवन
प्रेम से सारा जहाँ गुलज़ार है
हर तरफ़ मौजूद है 'रोहित' ख़ुदा
प्रेम से होता हमें दीदार है
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हर हाल में अब तो हमें तुम को ही पाना है
चाहे ज़माना जो कहे पर दिल ने ठाना है
चाहे ज़माना जो कहे पर दिल ने ठाना है
माना कि चलना इश्क़ की राहों पे है मुश्किल
पर क्या करें पगला हमारा दिल दिवाना है
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अब तक उसी से प्यार की आदत बनी रही
उस के ही साथ जीने की चाहत बनी रही
उस के ही साथ जीने की चाहत बनी रही
पत्थर के हैं सनम हमें मालूम है मगर
फिर भी बुतों की जग में इबादत बनी रही
ईमान धर्म की जहाँ बहती हवाएँ हैं
फिर भी दिलों में सबके सियासत बनी रही
दोनों के बीच कितनी ग़लत फ़हमियाँ रहीं
इन सब के बावजूद मुहब्बत बनी रही
धोते रहे हैं जिस्म वज़ू भी बहुत किए
‘रोहित’ मगर दिलों में नजासत बनी रही
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जिस दम सभी के सामने राज़-ए-वफ़ा खुला
सुन कर हमारी बात वे पत्थर से हो गए
सुन कर हमारी बात वे पत्थर से हो गए
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गुरु की रहमतों से भक्त का उद्धार होता है
इन्हीं की मेहरस रब का हमें दीदार होता है
इन्हीं की मेहरस रब का हमें दीदार होता है
चले नक़्शे क़दम पर जो अगर नूर-ए-इलाही के
तभी आवागमन के वो भँवर से पार होता है
रहें गर एक दूजे से सभी मिल कर उख़ुव्वत से
हमारा ख़ुशनुमा जा कर तभी संसार होता है
यही पैग़ाम देता जा रहा है ये मिशन अपना
मुहब्बत से फ़क़त सारा जहाँ गुलज़ार होता है
सभी को जोड़ने का काम ‛रोहित’ कर रहे मुर्शिद
हक़ीक़त में यही तो प्यार का किरदार होता है
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