Rohit Asthana Prabhav

Rohit Asthana Prabhav

@rohitasthana.nirankari2710

Rohit Asthana Nirankari shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rohit Asthana Nirankari's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
हमें हर ग़म भुला कर ज़िंदगी में शाद होना है
जहाँ की बंदिशों से इस क़दर आज़ाद होना है

अभी तक इश्क़ में हमने बड़ी बर्बादियाँ देखीं
मगर रोहित हमें अब इश्क़ में आबाद होना है
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Rohit Asthana Prabhav
मुझे रह-रह कर अक्सर ये 'प्रभव' एहसास होता है
कि तेरी और मेरी कैफ़ियत कुछ एक जैसी है
Rohit Asthana Prabhav
हम तेरे तुम मेरे हम-सफ़र हो गए
आज तुमसे मिले साल भर हो गए
Rohit Asthana Prabhav
यह धुँध आख़िर कब छठेगी ज़िंदगी की राह से
और कब खिलेगी धूप जिससे ज़ीस्त होगी ख़ुश-नुमा
Rohit Asthana Prabhav
यह ज़िंदगी तुझसे यही सुन ऐ मुसाफ़िर कह रही
हर दिन नई शुरुआत है हर दिन नया आग़ाज़ है
Rohit Asthana Prabhav
यही हर शख़्स की मुझसे सदा रहती शिकायत है
कि मैं हर काम करने में हमेशा देर करता हूं
Rohit Asthana Prabhav
किया मैंने कई दिन बाद फिर से उस गली का रुख़
मिरा अक्सर जिधर से संग यारों के गुज़रना था
Rohit Asthana Prabhav
हरिक नाराज़गी दिल से मिटा दें क्योंकि ऐ बंदों
गिले-शिकवे भुला कर प्यार करना ही इबादत है
Rohit Asthana Prabhav
मुसाफ़िर से सफ़र हर-रोज़ कहता है यही रोहित
कि ऐ राही तू चल तुझको तिरी मंज़िल बुलाती है
Rohit Asthana Prabhav
ये इश्क़ क्या है ये ज़रा मुझको बता ऐ ज़िंदगी
कर इश्क़ करने की मुझे तौफ़ीक़ अता ऐ ज़िंदगी
Rohit Asthana Prabhav
भले हरपल तिरे इस नूर का एहसास हो लेकिन
सुकून-ए-दिल तिरे दीदार के बिन आ नहीं सकता
Rohit Asthana Prabhav
हमें जहान में आना है और जाना है
हमारा फ़र्ज़ है जो उसको बस निभाना है

जहाँ में हम सभी खानाबदोश हैं यारों
अरे कहाँ पे कोई मुस्तक़िल ठिकाना है
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Rohit Asthana Prabhav
न जगने का समय तय है न तय है वक़्त सोने का
न पाने की मसर्रत है न कोई रंज खोने का

न ख़्वाहिश है न मक़सद है न कोई फ़िक्र मंज़िल की
मुझे है शौक़ शायद दोस्तों ख़ुद को डुबोने का
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Rohit Asthana Prabhav
मुहब्बत में मुझे भी अब पता यह चल गया यारों
कि मिलकर के बिछड़ना इश्क़ का दस्तूर होता है
Rohit Asthana Prabhav
चलेगा तू नहीं बनकर हमारे साथ हमराही
बनेगा फिर मुक़म्मल ज़िंदगी का ये सफ़र कैसे
Rohit Asthana Prabhav
वादी-ए-दिल पे बहारों ने दी थी जब दस्तक
ऐसे आलम में कभी हमको पुकारा होता
Rohit Asthana Prabhav
हर हाल में अब तो हमें तुमको ही पाना है
चाहे ज़माना जो कहे पर दिल ने ठाना है

माना कि चलना इश्क़ की राहों पे है मुश्किल
पर क्या करें पगला हमारा दिल दिवाना है
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Rohit Asthana Prabhav
गर प्यार है बता दो किसी और शख़्स से
नज़रें मिला के नज़रें चुराते हो किस लिए
Rohit Asthana Prabhav
जिस दम सभी के सामने राज़-ए-वफ़ा खुला
सुन कर हमारी बात वे पत्थर से हो गए
Rohit Asthana Prabhav
भले न बात रही वो जो बात पहले थी
दुआ सलाम में फिर भी नहीं कमी आई
Rohit Asthana Prabhav

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