Rohit Asthana Prabhav

Rohit Asthana Prabhav

@rohitasthana.nirankari2710

Rohit Asthana Nirankari shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rohit Asthana Nirankari's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

6

Content

29

Likes

104

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

Sher

नफ़रतों के अँधेरे मिटाते चलें हम चराग़-ए-मोहब्बत जलाते चलें — Rohit Asthana Prabhav
मुझे रह-रह कर अक्सर ये 'प्रभव' एहसास होता है कि तेरी और मेरी कैफ़ियत कुछ एक जैसी है — Rohit Asthana Prabhav
ये धुँध आख़िर कब छठेगी ज़िंदगी की राह से और कब खिलेगी धूप जिस सेे ज़ीस्त होगी ख़ुश-नुमा — Rohit Asthana Prabhav
यही हर शख़्स की मुझ सेे सदा रहती शिकायत है कि मैं हर काम करने में हमेशा देर करता हूँ — Rohit Asthana Prabhav
हरिक नाराज़गी दिल से मिटा दें क्योंकि ऐ बंदों गिले-शिकवे भुला कर प्यार करना ही इबादत है — Rohit Asthana Prabhav
ये इश्क़ क्या है ये ज़रा मुझ को बता ऐ ज़िंदगी कर इश्क़ करने की मुझे तौफ़ीक़ अता ऐ ज़िंदगी — Rohit Asthana Prabhav
मुहब्बत में मुझे भी अब पता ये चल गया यारों कि मिल कर के बिछड़ना इश्क़ का दस्तूर होता है — Rohit Asthana Prabhav
वादी-ए-दिल पे बहारों ने दी थी जब दस्तक ऐसे आलम में कभी हम को पुकारा होता — Rohit Asthana Prabhav
गर प्यार है बता दो किसी और शख़्स से नज़रें मिला के नज़रें चुराते हो किस लिए — Rohit Asthana Prabhav
हम तेरे तुम मेरे हम-सफ़र हो गए आज तुम सेे मिले साल भर हो गए — Rohit Asthana Prabhav
ये ज़िंदगी तुझ सेे यही सुन ऐ मुसाफ़िर कह रही हर दिन नई शुरुआत है हर दिन नया आग़ाज़ है — Rohit Asthana Prabhav
किया मैं ने कई दिन बा'द फिर से उस गली का रुख़ मिरा अक्सर जिधर से संग यारों के गुज़रना था — Rohit Asthana Prabhav
मुसाफ़िर से सफ़र हर-रोज़ कहता है यही रोहित कि ऐ राही तू चल तुझ को तिरी मंज़िल बुलाती है — Rohit Asthana Prabhav
भले हर-पल तिरे इस नूर का एहसास हो लेकिन सुकून-ए-दिल तिरे दीदार के बिन आ नहीं सकता — Rohit Asthana Prabhav
चलेगा तू नहीं बनकर हमारे साथ हमराही बनेगा फिर मुक़म्मल ज़िंदगी का ये सफ़र कैसे — Rohit Asthana Prabhav
जिस दम सभी के सामने राज़-ए-वफ़ा खुला सुन कर हमारी बात वे पत्थर से हो गए — Rohit Asthana Prabhav

Ghazal

मुसाफ़िर हैं यहाँ हर लोग आते और जाते हैं यहीं बनते बिगड़ते अनगिनत रिश्ते व नाते हैं किसी जब मुश्किलों में हम घिरे होते कहीं हैं तब हमारे कौन हैं अपने तभी हम आज़माते हैं बड़े ख़ामोश रहते हैं किसी से कुछ नहीं कहते भरा है दर्द सीने में मगर हम मुस्कुराते हैं सफ़र में ज़िंदगी के सब चले ही जा रहे बढ़ते कमाते हैं कई नफ़रत कई यूँँ प्यार पाते हैं ज़मीं पर जो बिखेरे रौशनी किरदार से अपने वही बनकर सितारे आसमाँ में जगमगाते हैं जहाँ में आइना हैं हम हमारा शौक है लिखना ग़ज़ल के ही सहारे असलियत को हम दिखाते हैं भले रोता रहे ये दिल हमारा हर घड़ी ‘रोहित’ मगर रहते जहाँ हैं हम वहाँ सब को हँसाते हैं — Rohit Asthana Prabhav

Nazm