Meaning of

सुख़नवरी

sukhanvari • سخنوری

कविता; वाक्पटुता; भाषण कला

poetry; art of speaking; eloquence

شاعری; فنِ سخن; فصاحت

Persian

आए सुख़नवरी में वो सुख की तलाश में
अब कह रहे हैं हर घड़ी दुख बढ़ रहा है दोस्त

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तुम सेे बिछड़ के आई हमें ये सुख़नवरी
हम को तुम्हारी याद ने शाइ'र बना दिया

पंछी मुझे कहीं तू अकेला न छोड़ दे
इस डर से मैं ने यार तुझे ख़ुद उड़ा दिया

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मिलने के बा'द हर कोई मसरूफ़ हो गया
जब तक नहीं मिले थे सभी बे क़रार थे

कोई सुख़नवरी थी न कोई हुनर था पास
लेकिन हमारे हक़ में तमाम इश्तिहार थे

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आए सुख़नवरी में वो सुख की तलाश में
अब कह रहे हैं हर घड़ी दुख बढ़ रहा है दोस्त

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तुम सेे बिछड़ के आई हमें ये सुख़नवरी
हम को तुम्हारी याद ने शाइ'र बना दिया

पंछी मुझे कहीं तू अकेला न छोड़ दे
इस डर से मैं ने यार तुझे ख़ुद उड़ा दिया

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सुख़नवरी शब्द भावनाओं और विचारों को शब्दों में पिरोने की कला को दर्शाता है। कविता में यह केवल भाषण नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति और वाक्पटुता का नृत्य बन जाता है।

कवि अक्सर सुख़नवरी का उपयोग भाषा की सुंदरता को उजागर करने के लिए करते हैं। यह कवि की शिल्पकला का उत्सव है। यह साधारण भाषण के विपरीत, कला की महत्ता को दर्शाता है।

सुख़नवरी आत्मा की फुसफुसाहट है, शब्दों की शक्ति का प्रमाण है।