तुम सेे बिछड़ा तो किधर जाऊँगा
मय-कदों के मैं नगर जाऊँगा
मरहला ये है उदासी का अब
ख़ुश हुआ यार तो मर जाऊँगा
आसमाँ मैं मुझे रहने दो तुम
शाम ढलते ही उतर जाऊँगा
यार आवाज़ लगाए कोई
मैं यहीं यार ठहर जाऊँगा
देखिए हाल मिरा ऐसा है
अब इसी तौर ही मर जाऊँगा
— Azhan 'Aajiz'















