आप का कहना तो ठीक है दोस्त पर
बे-वफ़ा है वो दिल मानता क्यूँ नहीं
बे-वफ़ा है वो दिल मानता क्यूँ नहीं
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देखो ऐसी बात नहीं है
मेरा है बस साथ नहीं है
मेरा है बस साथ नहीं है
रात अगर वो याद न आए
समझो दिन है रात नहीं है
कैसे धोखा दे सकता है
ये तो उस की ज़ात नहीं है
मैं थक जाता हूँ जी-जी कर
लेकिन मेरी मात नहीं है
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तुम्हारे दिल से निकल कर पछता रहे हैं हम
सितम तो ये है कि दिल को समझा रहे हैं हम
सितम तो ये है कि दिल को समझा रहे हैं हम
कि आओ मुझ को चले जाओ तुम कहीं ले कर
बहुत अपने आप से अब उकता रहे हैं हम
तुम्हें क्या मालूम तुम तो अब आई हो लड़की
किसी लड़की के लिए ही क्या क्या रहे हैं हम
तुम्हारा ये प्यार हम से क्या क्या कराएगा
ख़ुदा ने दी है ज़बाँ पर तुतला रहे हैं हम
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थक गए हम ज़िंदगी से
जी रहे हैं बेबसी से
जी रहे हैं बेबसी से
अब पढ़ाई ही करूँगा
भर गया मन आशिक़ी से
दोस्त तुम से पूछना था
कुछ मिला क्या दुश्मनी से
हूँ अकेला ज़िंदगी में
मुझ को क्या है फ़रवरी से
जल रहे हैं अब के सारे
आदमी ही आदमी से
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