तुमने जिस घर को हिस्सों में बाँटा है
    बीस बरस लगते हैं इक बनवाने में
    Shriyansh Qaabiz
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    बरसों बाद दिखा चहरा तो समझे हम
    कैसे इक तस्वीर पुरानी होती है
    Shriyansh Qaabiz
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    यहाँ सब लोग रोते ही मिले हैं
    कहानी इतनी अच्छी जा रही है
    Shriyansh Qaabiz
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    हम मिल के आ गये मगर अच्छा नहीं लगा
    फिर यूँ हुआ असर कि घर अच्छा नहीं लगा

    इक बार दिल में तुझसे जुदाई का डर बना
    फिर दूसरा कोई भी डर अच्छा नहीं लगा
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    Shriyansh Qaabiz
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    घड़ी घर की ज़रा धीरे है चलती
    इसे मालूम है सजना तुम्हारा
    Shriyansh Qaabiz
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    तुमसे बातें करके ये तो जान गया
    तुमको खोने वाले सब पछताएँगे
    Shriyansh Qaabiz
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    मिरे किरदार का मरना ही शायद
    कहानी की ज़रूरत बन गया था
    Shriyansh Qaabiz
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    फ़क़त हालत हमारी देख कर आँसू बहाते हो
    अरे बैठो अभी तुमको कहानी भी सुनाते हैं
    Shriyansh Qaabiz
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    इसी पर बैठ कर शब भर कहानी माँ सुनाती थी
    तभी ख़ुशबू सी आती है मुझे इस चारपाई से
    Shriyansh Qaabiz
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    दुआएँ भी नहीं जाती जहाँ तक
    हुए हो दूर तुम मुझसे वहाँ तक

    उदासी हमसफ़र बनकर चली थी
    मगर अब पूछ बैठी है , कहाँ तक

    अचानक ज़िंदगी रूठेगी हमसे
    अचानक ही कहेगी बस यहाँ तक

    मुसलसल चीख़ता हूँ सोचता हूँ
    सदा जाएगी कैसे दो-जहाँ तक

    मिरे मुर्शिद इजाज़त दें तो फिर मैं
    ज़रा आराम कर लूँ इम्तहाँ तक
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    Shriyansh Qaabiz
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