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Shriyansh Qaabiz
SHER
तुम ने जिस घर को हिस्सों में बाँटा है
बीस बरस लगते हैं इक बनवाने में
Shriyansh Qaabiz
10
SHER
बरसों बा'द दिखा चहरा तो समझे हम
कैसे इक तस्वीर पुरानी होती है
Shriyansh Qaabiz
9
SHER
यहाँ सब लोग रोते ही मिले हैं
कहानी इतनी अच्छी जा रही है
Shriyansh Qaabiz
8
SHER
हम मिल के आ गए मगर अच्छा नहीं लगा
फिर यूँँ हुआ असर कि घर अच्छा नहीं लगा
Shriyansh Qaabiz
7
SHER
घड़ी घर की ज़रा धीरे है चलती
इसे मालूम है सजना तुम्हारा
Shriyansh Qaabiz
6
SHER
तुम सेे बातें कर के ये तो जान गया
तुम को खोने वाले सब पछताएँगे
Shriyansh Qaabiz
5
SHER
मिरे किरदार का मरना ही शायद
कहानी की ज़रूरत बन गया था
Shriyansh Qaabiz
4
SHER
कितना भी ज़ोर दूँ मगर आता नहीं है याद
किस ने बताया था मुझे के खो गया हूँ मैं
Shriyansh Qaabiz
3
SHER
फ़क़त हालत हमारी देख कर आँसू बहाते हो
अरे बैठो अभी तुम को कहानी भी सुनाते हैं
Shriyansh Qaabiz
2
SHER
इसी पर बैठ कर शब भर कहानी माँ सुनाती थी
तभी ख़ुशबू सी आती है मुझे इस चारपाई से
Shriyansh Qaabiz
1
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