बहुत अच्छा है और अच्छा भी रखना है
    है उससे दोस्ती, रिश्ता भी रखना है

    सुनो माँ कल मुझे जल्दी उठा देना
    कि उसकी सीट पर बस्ता भी रखना है
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    Kuldeep Tripathi KD
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    मजनुओं को मारना है, ले लो ये दिल
    काम तो आए कहीं पत्थर हमारा
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    मौत का देखना है अब मंज़र
    फ़रवरी में गुलाब बेचूंगा
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    मेरी ग़ज़लों मिरे शेरों में होंगी ग़लतियाँ बेशक
    नहीं भेजा कोई मिसरा कभी उस्ताद को हमने
    Kuldeep Tripathi KD
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    मुफ़्लिसी का वो दौर भी देखा
    दर ब दर माँगते वफ़ा जब थे
    Kuldeep Tripathi KD
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    ज़हर होठों पे लगा के आया था वो
    था बड़ा शातिर, मियाँ दिलबर हमारा
    Kuldeep Tripathi KD
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    कि इतने ज़ख्म जो तूने दिए उस से
    कईं बच्चों को अब गिनती सिखाता हूँ
    Kuldeep Tripathi KD
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    बस सुनाकर इक कहानी को कई दिन
    यूँ किया ज़ाया जवानी को कई दिन

    जाम जब जब बे-वफ़ाई से भिड़ा है
    फिर रखा है दूर पानी को कई दिन
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    Kuldeep Tripathi KD
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    मुंतज़िर हूँ मैं तिरा राधा वगरना,
    गोपियाँ इस शहर की भी कम नहीं हैं
    Kuldeep Tripathi KD
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    राखियाँ जब देखता हूँ सोचता हूँ
    इक बहन देता मगर देता ख़ुदा तू
    Kuldeep Tripathi KD
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