Faizan Faizi

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@faizan_faizi

Faizan Raza Faizi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Faizan Raza Faizi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

अली के चाहने वालों को देखो लगाए भीड़ हैं करबल में बैठे — Faizan Faizi
फ़रिश्ते कान में बोलेंगे इक दिन चलो सरकार से मिलना नहीं है — Faizan Faizi
ज़माने में वही फिर से नई इक ईद आई है मिलेंगे लोग सारे फिर यहाँ झूठी तसल्ली से — Faizan Faizi
हमारे शे'र तुम पढ़ते नहीं हो हमारे दोस्त कैसे बन गए तुम — Faizan Faizi
गले लग कर बताना है तुम्हें अब कि रस्मन ईद पर मिलते सभी हैं — Faizan Faizi
मुझे आदत बदलनी है पुरानी नया इक इश्क़ करना है मुझे अब — Faizan Faizi
ये क्या हर बात पे लड़ना झगड़ना कभी लग कर गले समझाओ मुझ को — Faizan Faizi
नहीं आता किसी पे दिल हमारा नहीं लगता कोई तुझ सेा हसीं अब — Faizan Faizi
मुझे भी बा'द मरने के ख़ुदा जन्नत में डालेगा दुआएँ हैं मिरी हमराह मेरे दोस्त भी जाएँ — Faizan Faizi
सिखाया था जिसे यूँँ बोलने को वो हम से बद-तमीज़ी कर रहा है — Faizan Faizi
सभी को एक दिन मरना यहाँ है यही बस सोच कर सब मर रहे हैं — Faizan Faizi
नबी की पैरवी करते रहेंगे हम अपनी जान की बाज़ी लगा कर — Faizan Faizi
हम गरीबों पे इनायत कीजिए हैं परेशां हम सभी आक़ा यहाँ — Faizan Faizi
नए लोगों से मिलना पड़ रहा है पुराने सब बिछड़ते जा रहे हैं — Faizan Faizi
मिलना बिछड़ना काम तो होता रहेगा दोस्त अब जब साथ हैं सब, कुछ नई तस्वीर तो यूँंँ ही बना — Faizan Faizi
तिरी तस्वीर को मैं ज़ूम कर के बहुत से काम करता जा रहा हूँ — Faizan Faizi

Ghazal

हम तुम्हारे इश्क़ के इमकान में फूल ले कर हैं खड़े मैदान में बात को समझो अनाएँ छोड़ दो रूठ के बैठो न यूँँ मुल्तान में फूल से ख़ुश्बू जुदा होने लगी रख दिए थे आप जब गुलदान में एक दिन देखा किसी के साथ में हँस रही थी बैठ कर दालान में जा चुके जो लोग फिर आते नहीं है यही फ़ितरत यहाँ इंसान में पूछना था क्या हुआ था उस घड़ी रो रहे थे लोग जब ज़िंदान में इक तरफ़ रख दो सभी रंगीनियांँ इक तरफ़ ग़म को रखो मीजा़न में दोस्त मेरे हैं सभी अच्छे मगर नाम उन का दर्ज है शैतान में जब ग़रीबों की मदद करना कभी याद मत रखना उसे एहसान में कुछ नहीं हासिल हुआ मुझ को यहाँ कट रही है उम्र बस नुक़सान में आसमाँ पे जब बुलाना हो ख़ुदा मौत से कहना मिले रमज़ान में देख लो बेहतर किसी भी जान में कुछ नहीं है ख़ूबियाँ फैजा़न में — Faizan Faizi