Shadab Shabbiri

Shadab Shabbiri

@ShadabShabbiri1987

Shadab Shabbiri shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shadab Shabbiri's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

तिरा दीदार हो जाता मगर अफ़सोस है इस पर
कभी कुछ काम ले डूबा कभी आराम ले डूबा

Shadab Shabbiri

जंग का एक ही इलाज है बस
और वो ये कि सुल्ह हो जाए

Shadab Shabbiri

किसी के दिल को दुखाना मुझे पसंद नहीं
क़सम से रोना रुलाना मुझे पसंद नहीं

Shadab Shabbiri

ब-कसरत चायनोशी के सबब ही
मिरी तासीर ठंडी हो गई है

Shadab Shabbiri

जानता हूँ कि अलग हो गईं राहें लेकिन
दिल मिरा अब भी तुम्हारा ही तमन्नाई है

Shadab Shabbiri

आग से खेलने की उम्र में तुम
बर्फ़ से खेलते हो हैरत है

Shadab Shabbiri

मौत आसान नहीं थी लेकिन
हमने जी कर इसे आसानी दी

Shadab Shabbiri

जवानी की मुहब्बत पर नज़र रहती है दुनिया की
बुढ़ापे की मुहब्बत में कोई ख़तरा नहीं होता

Shadab Shabbiri

आप बड़े थे आप बड़े हैं मैं छोटा था मैं छोटा हूँ
आप खरे थे आप खरे हैं मैं खोटा था मैं खोटा हूँ

Shadab Shabbiri

जनवरी माह देखने के लिए
हम गुज़ारे गए दिसम्बर से

Shadab Shabbiri

ज़माना तो उठाना चाहता है
मैं पैर अपने जमाना चाहता हूंँ

Shadab Shabbiri

तुम्हें शादाब होना चाहिए था
मगर तुम हो कि मुरझाए हुए हो

Shadab Shabbiri

तपिश थी उस परी पैकर की ऐसी
बताने में पसीना आ रहा है

Shadab Shabbiri

या ख़ुदा इसको बहुत जल्द ज़माने से उठा
बद-दुआ दे के कोई मेरे सिरहाने से उठा

Shadab Shabbiri

ऐन ग़ैन नून है सुकून है
हसरतों का ख़ून है सुकून है

Shadab Shabbiri

हिज्र की रात शाइरों वाली
फिर वही बात शाइरों वाली

Shadab Shabbiri

चाहत ने ला के छोड़ा है ऐसे मुका़म पर
मैं भी उदास वो भी परेशाँ है आज कल

उस के भी रुख़ का रंग ज़रा ज़र्द-ज़र्द है
अपना भी तार-तार गिरेबाँ है आज कल

Shadab Shabbiri

कभी लगते गले से वो कभी सरगोशियांँ करते
कभी नज़रें झुकाते और शरमाते तो अच्छा था

Shadab Shabbiri

टूटता क्यों है फिर बदन मेरा
आज तो मैं कहीं गया भी नहीं

Shadab Shabbiri

वह भी बहुत अजीब है हम भी अजीब हैं
यानी कि दोनों मिल के अजीब-ओ-ग़रीब हैं

Shadab Shabbiri

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