नाम लिखूँ जो तेरा पत्थर भी मख़मल हो जाएचाँद लिखूँ तो सारे तारे भी ओझल हो जाएजाम कहूँ तो आँखें तेरी दिखे ओ मेरे काफ़िरनाम लूँ तेरा महफ़िल में तो यार ग़ज़ल हो जाए— Kaffir