
नज़्म-शेरो-शायरी तो बद-दिलों की बात है
झेलना तूफ़ाँ अभी क्या साहिलों की बात है
ज़ख़्म देकर क़त्ल तो काफ़िर सभी करते मगर
बा-मोहब्बत क़त्ल माहिर क़ातिलों की बात है
— Kaffir
Other sher from the same pen
Shers of teer.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling