आख़िर तो कठघरे में सब को हाज़िर होना हैहिसाब ये पुण्य-पाप का सब ज़ाहिर होना हैतुम कर लो नाटक मंदिर वाले-मस्जिद वालेआख़िर में तो सब को काफ़िर-काफ़िर होना है— Kaffir