मैं तो बस इक सफ़र का ही परिंदा हूँसफ़र के ख़त्म होने तक ही ज़िंदा हूँमुझे तुम ख़्वाब जन्नत के दिखाओ मतमैं दोज़ख़ से निकाला इक दरिंदा हूँ— Kaffir