"उम्मीद एक रास्ता"
आँखों में कुछ सपने ले कर
उम्मीदों के साथ चलो तुम
उम्मीदों पर दुनिया क़ायम
मन में ये विश्वास रखो तुम
रस्ता मुश्किल हो सकता है
घोर अँधेरा हो सकता है
लेकिन तुम को बढ़ना होगा
अँधियारों से लड़ना होगा
साहस थोड़ा और लगेगा
तन थोड़ा सा और जलेगा
बदलेगा फिर मंज़र सारा
कश्ती होगी और किनारा
रात जो थी अब बीत गई है
चीर अँधेरा सुब्ह हुई है
आँसू संदेशा ले आए
तुम ने मंज़िल हासिल की है
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निकल के ख़्वाब से तक़दीर हो जाऊँ
है ख़्वाहिश सच की मैं जागीर हो जाऊँ
है ख़्वाहिश सच की मैं जागीर हो जाऊँ
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Rupesh Rahi
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गिले शिकवे भुलाकर क्यूँ नहीं चलते
दिलों से दिल मिलाकर क्यूँ नहीं चलते
दिलों से दिल मिलाकर क्यूँ नहीं चलते
सियासत के बिछाए जाल हैं ये सब
ये मन में तुम बिठाकर क्यूँ नहीं चलते
पड़ा है जो तुम्हारी आँख पर यकसर
वही पर्दा हटाकर क्यूँ नहीं चलते
हुआ क्या है फ़क़त कुछ ख़्वाब टूटे हैं
नए सपने सजाकर क्यूँ नहीं चलते
अँधेरे में रखोगे ख़ुद को यूँ कब तक
कि लौ ख़ुद ही जलाकर क्यूँ नहीं चलते
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कहानी का अहम हिस्सा है ये दिल
मैं मंज़िल हूँ मेरा रस्ता है ये दिल
मैं मंज़िल हूँ मेरा रस्ता है ये दिल
नहीं होता है जो तक़दीर में ही
उसी के इश्क़ में पड़ता है ये दिल
बहुत समझाया है इस को किसी ने
किसी की पर कहाँ सुनता है ये दिल
सुना है घर नहीं होता है इस का
किसी के दिल में ही बसता है ये दिल
नहीं मिलता मेरे मेआ'र से जो
गवारा ही नहीं करता है ये दिल
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वक़्त आने पे सब को बता जाएँगे
दिल में जितनी है उल्फ़त निभा जाएँगे
दिल में जितनी है उल्फ़त निभा जाएँगे
कोई पूछेगा जब होती है क्या वफ़ा
हम तिरंगे में सो कर दिखा जाएँगे
हम जिएँ या मरें इस का कुछ ग़म नहीं
मान अपने वतन का बढ़ा जाएँगे
राख होने से पहले ख़ुदा की क़सम
आग सीने में सबके लगा जाएँगे
जिन की ख़ुशबू रहेगी जहाँ में सदा
गुल चमन में हम ऐसे खिला जाएँगे
देख लेना किसी रोज़ शिद्दत से हम
हँसते-हँसते सभी को रुला जाएँगे
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सब कहानी सुनाते हैं दरबार की
बात करता नहीं कोई लाचार की
बात करता नहीं कोई लाचार की
जी-हुज़ूरी के दम पर है चलने लगा
कैसी हालत हुई है ये संसार की
बा'द पढ़ने के शब्दों को जानोगे तुम
धार होती नहीं तेज़ तलवार की
बाप का मान जिस ने न रक्खा कभी
ख़ाक समझेगा क़ीमत वो दस्तार की
है वही शख़्स प्यारा हमें जान से
ज़िंदगी जिस ने जीनी है दुश्वार की
उँगलियाँ दूसरों पर उठाता रहा
जाँच की ही नहीं अपने किरदार की
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सुकूँ अपना गँवाया है किसी ने
दरख़्तों को गिराया है किसी ने
दरख़्तों को गिराया है किसी ने
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