Rupesh Rahi

Top 10 of Rupesh Rahi

    "उम्मीद एक रास्ता"

    आँखों में कुछ सपने ले कर
    उम्मीदों के साथ चलो तुम
    उम्मीदों पर दुनिया क़ायम
    मन में ये विश्वास रखो तुम

    रस्ता मुश्किल हो सकता है
    घोर अँधेरा हो सकता है
    लेकिन तुम को बढ़ना होगा
    अँधियारों से लड़ना होगा

    साहस थोड़ा और लगेगा
    तन थोड़ा सा और जलेगा
    बदलेगा फिर मंज़र सारा
    कश्ती होगी और किनारा

    रात जो थी अब बीत गई है
    चीर अँधेरा सुब्ह हुई है
    आँसू संदेशा ले आए
    तुम ने मंज़िल हासिल की है
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    Rupesh Rahi
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    निकल के ख़्वाब से तक़दीर हो जाऊँ
    है ख़्वाहिश सच की मैं जागीर हो जाऊँ
    Rupesh Rahi
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    एक-तरफ़ा इश्क़ का इज़हार करना चाहते हो
    खु़द को शर्मिंदा सर-ए-बाजार करना चाहते हो

    तुम अगर जो हो नहीं पाए किसी भी दिल पे क़ाबिज़
    इस लिए तुम जिस्म का व्यापार करना चाहते हो
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    Rupesh Rahi
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    ज़ख़्म-ए-दिल शाद हुए आते हैं
    हम जो पहलू में तिरे आते हैं

    कौन सी डोर है वो जिस से हम
    बस तिरी ओर खिंचे आते हैं

    किस तरह वश में किसे करना है
    पैंतरे सारे उसे आते हैं

    भूलना लाख भी चाहूँ उस को
    ख़्वाब उस के ही मुझे आते हैं

    सोचने भर से तुझे हम जानाँ
    अश्क आँखों में लिए आते हैं
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    Rupesh Rahi
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    गिले शिकवे भुलाकर क्यूँ नहीं चलते
    दिलों से दिल मिलाकर क्यूँ नहीं चलते

    सियासत के बिछाए जाल हैं ये सब
    ये मन में तुम बिठाकर क्यूँ नहीं चलते

    पड़ा है जो तुम्हारी आँख पर यकसर
    वही पर्दा हटाकर क्यूँ नहीं चलते

    हुआ क्या है फ़क़त कुछ ख़्वाब टूटे हैं
    नए सपने सजाकर क्यूँ नहीं चलते

    अँधेरे में रखोगे ख़ुद को यूँ कब तक
    कि लौ ख़ुद ही जलाकर क्यूँ नहीं चलते
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    Rupesh Rahi
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    कहानी का अहम हिस्सा है ये दिल
    मैं मंज़िल हूँ मेरा रस्ता है ये दिल

    नहीं होता है जो तक़दीर में ही
    उसी के इश्क़ में पड़ता है ये दिल

    बहुत समझाया है इस को किसी ने
    किसी की पर कहाँ सुनता है ये दिल

    सुना है घर नहीं होता है इस का
    किसी के दिल में ही बसता है ये दिल

    नहीं मिलता मेरे मेआ'र से जो
    गवारा ही नहीं करता है ये दिल
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    Rupesh Rahi
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    वक़्त आने पे सब को बता जाएँगे
    दिल में जितनी है उल्फ़त निभा जाएँगे

    कोई पूछेगा जब होती है क्या वफ़ा
    हम तिरंगे में सो कर दिखा जाएँगे

    हम जिएँ या मरें इस का कुछ ग़म नहीं
    मान अपने वतन का बढ़ा जाएँगे

    राख होने से पहले ख़ुदा की क़सम
    आग सीने में सबके लगा जाएँगे

    जिन की ख़ुशबू रहेगी जहाँ में सदा
    गुल चमन में हम ऐसे खिला जाएँगे

    देख लेना किसी रोज़ शिद्दत से हम
    हँसते-हँसते सभी को रुला जाएँगे
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    Rupesh Rahi
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    सब कहानी सुनाते हैं दरबार की
    बात करता नहीं कोई लाचार की

    जी-हुज़ूरी के दम पर है चलने लगा
    कैसी हालत हुई है ये संसार की

    बा'द पढ़ने के शब्दों को जानोगे तुम
    धार होती नहीं तेज़ तलवार की

    बाप का मान जिस ने न रक्खा कभी
    ख़ाक समझेगा क़ीमत वो दस्तार की

    है वही शख़्स प्यारा हमें जान से
    ज़िंदगी जिस ने जीनी है दुश्वार की

    उँगलियाँ दूसरों पर उठाता रहा
    जाँच की ही नहीं अपने किरदार की
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    Rupesh Rahi
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    सुकूॅं अपना गॅंवाया है किसी ने
    दरख़्तों को गिराया है किसी ने

    परिंदे फिर रहे हैं मारे - मारे
    किसी का घर जलाया है किसी ने

    नहीं यूँॅं ही तुम्हें सींचा गया है
    लहू अपना बहाएा है किसी ने

    जहाँ शाबाशियों का घर था पहले
    वहीं ख़ंजर चलाया है किसी ने

    नहीं बाक़ी बचा अब हौसला है
    बहुत पागल बनाया है किसी ने
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    Rupesh Rahi
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    सुकूँ अपना गँवाया है किसी ने
    दरख़्तों को गिराया है किसी ने
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