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किए थे पाप जितने भी बुरे सदक़ा उतारा था
हज़ारों मुश्किलों की जद में रिश्ता हमारा था
हज़ारों मुश्किलों की जद में रिश्ता हमारा था
गिरे थे भाव सोंनें और चाँदी के मिनट भर में
उसनें जब भरी बाज़ार में झुमका उतारा था
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हिज्र से तंग आके मैं ने तस्वीर उस की तोड़ दी
छिपकली भी देख कर ये दर्द मेरा रो पड़ी
छिपकली भी देख कर ये दर्द मेरा रो पड़ी
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