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ग़ैर कहे पागल मुझ को तो बुरा लगता है
तुम पागल कहती हो तो अच्छा लगता है
तुम पागल कहती हो तो अच्छा लगता है
हर क़ीमत पर चाहा है तुम को ख़ुश देखूँ
तुम्हीं कहो ये प्यार नहीं तो क्या लगता है
एक तुम्हीं बस सच्ची लगती हो दुनिया में
बाक़ी तो ये सारा जहाँ झूठा लगता है
ऐसे ही तुम्हारे ख़्वाबों में खोए रहना
लोगों को अब ये मेरा पेशा लगता है
देख तुम्हारा हँसता चेहरा हँस देता हूँ
मुझ को चेहरा कम शीशा ज़्यादा लगता है
मैं तो तुम को ले कर बिल्कुल संजीदा हूँ
अच्छा तुम को इस बारे में क्या लगता है
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जब भी कोई आना चाहे आने दो
जब भी कोई जाना चाहे जाने दो
जब भी कोई जाना चाहे जाने दो
मैं ने तो बस उस को दावत दी थी पर
ग़ैर को भी लाना चाहे तो लाने दो
दोस्त कहूँगी तुम को लेकिन प्यार नहीं
फिर मैं क्यूँ पूछूँ तुम इस के माने दो
होश में जब भी आएगा पछताएगा
आज अगर चिल्लाता है चिल्लाने दो
ग़म ही तो है आख़िर कब तक ठहरेगा
ग़म भी है सफ़ में तो ग़म भी आने दो
सच में ख़ुश हो तो तोहफ़ों के बदले में
कभी न भूलूंँ कुछ ऐसे अफ़साने दो
ग़ैर किसी में इतनी हिम्मत थोड़े है
मेरे अपने लूट रहे लुट जाने दो
कितना शातिर हूँ ये भी बतलाऊँगा
बन्धू मेरे सही समय तो आने दो
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मियाँ खुदको मिटाने जा रहे हो
सुना है दिल लगाने जा रहे हो
सुना है दिल लगाने जा रहे हो
पढ़ाया इश्क़ का ये पाठ किस ने
जो अपना सब गँवाने जा रहे हो
वही मासूमियत फिर से अमांँ क्या
किसी का दिल दुखाने जा रहे हो
मेरी मानों ज़रा मासूम हो लो
अगर उस को मनाने जा रहे हो
निकालो हम पुरानों का भी कुछ हल
हमें यूँ ही भुलाने जा रहे हो
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