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Top 10 of
Puneet Mishra Akshat
SHER
यहाँ अब कौन करता है ज़माने में वफ़ा उल्फ़त
यहाँ उल्फ़त के आड़े जिस्म के व्यापार होते हैं
Puneet Mishra Akshat
10
SHER
तुम्हारे ख़्वाब बिछड़े आ रहे हैं
हमें ये बारहा तड़पा रहे हैं
Puneet Mishra Akshat
9
SHER
किसी की चंद रातों का सुधाकर हो नहीं पाया
तुम्हारी उर्मियों का मैं, उर-अंतर हो नहीं पाया
Puneet Mishra Akshat
8
SHER
तुम से बिछड़ कर और निखरने वाले हैं
हम माँ की बाँहों में मरने वाले हैं
Puneet Mishra Akshat
7
SHER
एक बरस अब पूरा होने वाला है
पिछले साल इसी मौसम में बिछड़े थे
Puneet Mishra Akshat
6
GHAZAL
दिल में नफ़रत थी जली हैं बस्तियाँ
ले गए वो सामने से अर्थियाँ
Puneet Mishra Akshat
5
GHAZAL
जिसे चाहा वही अपना तो दिलबर हो नहीं सकता
मुहब्बत का सबब हर दम मुयस्सर हो नहीं सकता
Puneet Mishra Akshat
4
SHER
हर दिए को मुयस्सर नहीं रौशनी
रात भर एक जुगनू जला रह गया
Puneet Mishra Akshat
3
GHAZAL
सपनों का संसार बना कर क्या पाया?
इक झूठा अख़बार बना कर क्या पाया?
Puneet Mishra Akshat
2
SHER
कितने दर्द सहेजे हम ने,तब जा कर ये गीत लिखे हैं
तुम क्या जानों इन नयनों की कितनी पीर पुरानी होगी
Puneet Mishra Akshat
1
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