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Top 10 of
Puneet Mishra Akshat
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Puneet Mishra Akshat
यहाँ अब कौन करता है ज़माने में वफ़ा उल्फ़त
यहाँ उल्फ़त के आड़े जिस्म के व्यापार होते हैं
मुझे बीता हुआ अपना ज़माना याद आता है
कहाँ फिर से वो बचपन के भला इतवार होते हैं
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Puneet Mishra Akshat
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किसी की चंद रातों का सुधाकर हो नहीं पाया
तुम्हारी उर्मियों का मैं, उरन्तर हो नहीं पाया
सरल थीं मन की प्रतिमाएं, मगर अफ़सोस है इतना
मैं सब कुछ था तेरा, मेहंदी महावर हो नहीं पाया
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Puneet Mishra Akshat
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तुम से बिछड़ कर और निखरने वाले हैं
हम माँ की बाँहों में मरने वाले हैं
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एक बरस अब पूरा होने वाला है
पिछले साल इसी मौसम में बिछड़े थे
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उसकी आँखों से मैं लिपटा तो बिखर जाऊंगा
इसलिए वो मुझे काजल नहीं होने देता
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दिल में नफ़रत थी जली हैं बस्तियाँ
ले गये वो सामने से अर्थियाँ
कह गये आँसू मिरे अल्फ़ाज वो
जो न थीं कह पायी ये ख़ामोशियाँ
यूँ तमाशा मत करो इस प्यार का
इस तमाशे पर लगी हैं बोलियाँ
बेवज़ह काटा गया है ये शज़र
रौंद कर इसको गयी थीं आँधियाँ
आपने तन्हा बनाया है मुझे
कुछ तो होंगी आपकी मज़बूरियाँ
हम चमन में फिर से लायेंगे अमन
मन्दिरों मस्ज़िद की करके सन्धियाँ
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Puneet Mishra Akshat
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जिसे चाहा वही अपना तो दिलबर हो नहीं सकता
मुहब्बत का सबब हर दम मयस्सर हो नहीं सकता
कभी ग़र लग गया दामन पे धब्बा इस ज़माने का
तो कितना कुछ भी कर लो पर वो बहतर हो नहीं सकता
ज़ला दो आज नफ़रत को मुहब्बत के हवाले से
जहॉ पर बैर हो सबसे कभी घर हो नहीं सकता
मिलेगा बस तुम्हें उतना लिखा जितना नसीबों में
जिसे चाहें वही अपना मुकद्दर हो नहीं सकता
जुदा होकर सफ़र के बीच से फिर छोड़ कर जाना
हमारा दिल तुम्हारे दिल-सा पत्थर हो नहीं सकता
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Puneet Mishra Akshat
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हर दिए को मयस्सर नहीं रौशनी
रात भर एक जुगनू जला रह गया
मैंने रस्में-निशानी में दिल दे दिया
और वो था के बस बेवफ़ा रह गया
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Puneet Mishra Akshat
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सपनों का संसार बनाकर क्या पाया?
इक झूठा अख़बार बनाकर क्या पाया?
इश्क़ तुम्हारे पहलू में आ गिरता ख़ुद
ग़ैरत-सा क़िरदार बनाकर क्या पाया?
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Puneet Mishra Akshat
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कितने दर्द सहेजे हमने,तब जाकर ये गीत लिखे हैं
तुम क्या जानों इन नयनों की कितनी पीर पुरानी होगी
Puneet Mishra Akshat
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