जिस वहशत ने तुमको है बेकार किया
    हमने उसका सालों कारोबार किया

    ख़ाक उड़ाई ख़ूब ख़ुदा की दुनिया में
    यूँ ही नइँ इन ग़ज़लों ने सरदार किया

    ज़ख्मों ने है मुझको गर शोहरत दे दी
    यानी पेड़ ने धूप को भी आहार किया

    सबसे पहले सुर्ख़ तअल्लुक तोड़ दिए
    और नज़र को गंगा के उस पार किया

    एक तुम्हारी याद ही मेरी साथिन है
    माँ कहती है किसको किसको प्यार किया

    मैं कहता हूँ बदन ठिकाने लग जाए
    दिल कहता है बिलकुल हाँ सरकार किया

    अव्वल आना ही मेरा मुस्तक़बिल है
    घर भर में पहला हूँ जिसने प्यार किया
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    कोई छोड़ के जाए तो हैरत कैसी
    ख़ुद से समझौता क्या पहली बार किया
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    मान करके वफ़ा की सब शर्तें
    हमने दुनिया सँभाल रक्खी है
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    तुम्हारे साथ जो हँसता बहलता एक लड़का है
    पलटकर रो भी पड़ता है, मगर तुझसे नहीं कहता
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    मेरी ऐसी हालत है
    फिर भी तुमको दिक़्क़त है

    अपनी जिद पे क़ायम हूँ
    पागल जैसी हालत है

    मेरी चिंता करते हैं
    यानी मुझसे नफ़रत है

    मेरे आँसू देखोगे
    बोलो इतनी हिम्मत है

    दफ़्तर अपना फूँक दिया
    आओ बैठो फ़ुर्सत है

    दुनिया अपनी फूँक चुके
    हाँ अब थोड़ी राहत है

    चैन मुझे गर आ जाए
    मेरे ग़म पर लानत है

    आप बड़े ख़ुश रहते हैं
    अपनी अपनी आदत है

    ज़ख़्म मुझे भेजा करिए
    इससे मुझे मुहब्बत है
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    SWAPNIL YADAV 'NIL'
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    जब भी मौत हमारी ख़्वाहिश दूर किनारे करती है
    तब दुनिया हो होकर साधू खूब ख़सारे करती है

    ये ख़िदमतगारी है मेरी इस दुनिया की महफ़िल में
    मैं अंधा हूँ पर ये दुनिया खूब शरारे करती है

    कहने वाले कहते हैं ये दुनिया है रंगीन बहुत
    एक ख्वाहिश-ए-क़ज़ा है जो बर्बाद नज़ारे करती है

    दोनों हाथों से ये धड़कन खूब दबा हम लेते हैं
    जैसे ही तक़दीर कभी नज़दीक तुम्हारे करती है

    हम लेटे रहते हैं पीकर कितने जाम उदासी के
    इक साक़ी-सी दुनिया आगे रक़्स हमारे करती है

    जब भी मौत का बोसा आकर साँस उड़ाने लगता है
    तब तब दुनिया भी दूरी से शोख़ इशारे करती है
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    न लौटोगे कभी तुम जानता हूँ
    ये मेरी ज़िंदगी है फ़िल्म थोड़ी
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    ख़ुदी की शख़्सियत से भागते हो
    दिसम्बर की गलन में आग-से हो

    नई पाबंदियाँ हैं लो सुनो सब
    अगर हो इश्क़ तो हमज़ात से हो

    सुनाई दे रही है जो अज़ल से
    उसी आवाज़ के तुम क़ाफ़िये हो

    पता महरूम का इक पूछता हूँ
    मिरे में शख़्स था इक जानते हो
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    SWAPNIL YADAV 'NIL'
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    आपका अक्स मुझमें अमृत था
    आपका हिज्र दिल पे आरी है
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    हम लेटे रहते हैं पीकर इतने जाम उदासी के
    इक साक़ी सी दुनिया आगे रक्स हमारे करती है
    SWAPNIL YADAV 'NIL'
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