मेरी ऐसी हालत है
फिर भी तुम को दिक़्क़त है
अपनी जिद पे क़ायम हूँ
पागल जैसी हालत है
मेरी चिंता करते हैं
या'नी मुझ से नफ़रत है
मेरे आँसू देखोगे
बोलो इतनी हिम्मत है
दफ़्तर अपना फूँक दिया
आओ बैठो फ़ुर्सत है
दुनिया अपनी फूँक चुके
हाँ अब थोड़ी राहत है
चैन मुझे गर आ जाए
मेरे ग़म पर लानत है
आप बड़े ख़ुश रहते हैं
अपनी अपनी आदत है
ज़ख़्म मुझे भेजा करिए
इस से मुझे मुहब्बत है
— SWAPNIL YADAV 'NIL'















