Arohi Tripathi

Arohi Tripathi

@Arohi_6258

Arohi Tripathi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Arohi Tripathi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

शाहज़ादे पता नहीं तुम को तुम पे कितनी कनीज़ मरती हैं — Arohi Tripathi
अपने किए पे तुम हो पशेमान किस लिए इनकार कर रही हो मेरी जान किस लिए — Arohi Tripathi
राम लिखने लगी मैं काग़ज़ पर काम आसान हो गए मेरे — Arohi Tripathi
शाहज़ादी ख़बर नहीं तुझ को तुझ पे कितने ग़ुलाम मरते हैं — Arohi Tripathi
तुम्हें तो अपने कहे पर भी ए'तिबार नहीं हमारे बा'द तुम्हें भी किसी से प्यार नहीं — Arohi Tripathi
ग़रीब लोग मोहब्बत न कर सकें तो क्या अलग है बात ज़ियारत न कर सकें तो क्या — Arohi Tripathi
इश्क़ करना है मुसीबत डर गए ये सोच कर बा'द तेरे इश्क़ वाले मर गए ये सोच कर — Arohi Tripathi
महीनों बा'द जब वापस से अपने घर गई थी मैं अधूरी बात को कहते हुए ही मर गई थी मैं — Arohi Tripathi
हर चीज़ पे छाई है उदासी ही उदासी अब घर मेरे आई है उदासी ही उदासी — Arohi Tripathi
माना कि आज भी मैं पढ़ती नहीं नमाज़ लेकिन ख़ुदा क़सम काफ़िर नहीं हूँ मैं — Arohi Tripathi
दिल से मेरे उतर गया जानी था जो लड़का वो मर गया जानी — Arohi Tripathi
ग़म का मारा कोई नहीं होता बे-सहारा कोई नहीं होता — Arohi Tripathi
आप के हम बड़े दिवाने हैं आप के होंठ काट खाने हैं — Arohi Tripathi
क्या ही बताऊँ मैं तुम्हें क्या हाल था मेरा उस ने लबों को चूम के हालत ख़राब की — Arohi Tripathi
इश्क़ का जब बुख़ार उतरेगा तब मिरा यार ऐसे चीख़ेगा — Arohi Tripathi
हम मोहब्बत नहीं समझते हैं बात ये तुम ग़लत समझते हो — Arohi Tripathi

Ghazal

पास रहने को घर नहीं होगा इस सेे ज़्यादा सफ़र नहीं होगा आख़िरी बार चूम लो माथा फिर इधर से गुज़र नहीं होगा क़त्ल कर दो मिरी मोहब्बत का मेरा छलनी जिगर नहीं होगा आ मिरे लब को चूम ले दिलबर ज़हर का कुछ असर नहीं होगा जिस जगह तुम ने पाँव रक्खे हैं उस जगह गुलमोहर नहीं होगा भूलने में लगा तो इक हफ़्ता इस सेे ज़्यादा मगर नहीं होगा इक कहानी सुनो मोहब्बत की हिज्र का जिस में डर नहीं होगा याद कर के तुझे ही ज़िंदा हैं क्या लगा चारा-गर नहीं होगा वो ज़माना था दूसरा साहब अब सफ़र ये उधर नहीं होगा ज़िक्र करते नहीं थके हम तो क्या हुआ जो अगर नहीं होगा मैं नहीं तुम ही छोड़ दो मुझ को लौट आना अगर नहीं होगा गाँव कस्बा तुझे तलाशा है जो बचा हो नगर नहीं होगा तेरे जाने के बा'द याद रहे अब यहाँ पर शजर नहीं होगा — Arohi Tripathi

Nazm

"मैं और तुम" हम दोनों मुस्तकबिल में एक होना चाहते थे मैं इस ख़याल से डरती थी और वो दुआ माँगते थे वो मुझे हर घड़ी और मोड़ पे सँभालता था मगर दोनों डरते थे क्योंकि दोनों अलग मज़हब से थे इश्क़ में इतनी पाबंदी है क्यूँ मैं इसी सोच में रोया करती थी आँख से आँसू बहते थे तकिए को भिगोया करती थी और वो भी इसी सोच में परेशान था मैं हिंदू थी और वो मुसलमान था साथ होकर कभी अलग होंगे यार फिर साथ में ग़लत होंगे डाँटती थी उसे बराबर दिन और वो चुप मुझे अजब होंगे उस के घर वाले मान जाते लेकिन मेरा घर मुझे मार देता मैं अगर उस की नहीं होती एक दिन वो ख़ुद को हार देता इस लिए हम दोनों एक अच्छी नौकरी चाहते थे नौकरी होगी तो सब मान आई जाएँगे ये हम मानते थे लेकिन हमें पता नहीं था हमारे साथ आगे क्या होगा या फिर हम उस के रहेंगे भी या वो मुझ सेे जुदा होगा दोनों डरते थे समाज के है एक इंसान से लोग कहते थे धोखा मिलता है मुसलमान से हम एक दूजे को अच्छे से समझते थे लेकिन सारा जमाना हमारे ख़यालों से अनजान था फ़र्क़ इतना था बस मैं हिंदू थी और वो मुसलमान था — Arohi Tripathi