jis vehshat ne tumko hai bekar kiya | जिस वहशत ने तुमको है बेकार किया

  - SWAPNIL YADAV 'NIL'

जिस वहशत ने तुमको है बेकार किया
हमने उसका सालों कारोबार किया

ख़ाक उड़ाई ख़ूब ख़ुदा की दुनिया में
यूँँ ही नइँ इन ग़ज़लों ने सरदार किया

ज़ख्मों ने है मुझको गर शोहरत दे दी
यानी पेड़ ने धूप को भी आहार किया

सब सेे पहले सुर्ख़ तअल्लुक तोड़ दिए
और नज़र को गंगा के उस पार किया

एक तुम्हारी याद ही मेरी साथिन है
माँ कहती है किसको किसको प्यार किया

मैं कहता हूँ बदन ठिकाने लग जाए
दिल कहता है बिलकुल हाँ सरकार किया

अव्वल आना ही मेरा मुस्तक़बिल है
घर भर में पहला हूँ जिसने प्यार किया

  - SWAPNIL YADAV 'NIL'

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