है आना गर हमारी ज़िंदगी में
हमें समझा करेगा ख़ामुशी में
कहानीकार को समझा रहा हूँ
कोई किरदार मारो आख़िरी में
करोगे क्या अगर जो लौट आया
वो भूला नाम फिर से बन्दगी में
मैं दुनिया जीतना तो चाहता हूँ
और उसको भी जो है रहता इसी में
वफ़ा के पैरहन को ओढ़ करके
बदन रौशन हुए दो तीरगी में
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