इस को इक दुनिया के जैसी करनी है
सब से पहले दुनिया मिट्टी करनी है
सुनो परिंदों शाम हुई है उड़ जाओ
मुझ को घर में दीया बत्ती करनी है
तुझ को भी रिन्दों के दर्द समझने हैं
तुझ को भी क्या मुझ से शादी करनी है
दिल जलता है यार हमारा छोड़ मगर
आग जली है सिगरेट-नोशी करनी है
— SWAPNIL YADAV 'NIL'















