सपनों का संसार बना कर क्या पाया?
इक झूठा अख़बार बना कर क्या पाया?
इश्क़ तुम्हारे पहलू में आ गिरता ख़ुद
ग़ैरत-सा क़िरदार बना कर क्या पाया?
— Puneet Mishra Akshat
इक झूठा अख़बार बना कर क्या पाया?
इश्क़ तुम्हारे पहलू में आ गिरता ख़ुद
ग़ैरत-सा क़िरदार बना कर क्या पाया?
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