हर इक क़यास से आगे निकल गया हूँ मैं
    ज़माना कहता है बिल्कुल बदल गया हूँ मैं

    मेरे वुजूद को वैसे मिटा तो देता वो
    ख़ुदारा वक़्त से पहले सँभल गया हूँ मैं
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    Nityanand Vajpayee
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    जीते जी मर जाना कोई खेल नहीं
    उनसे इश्क लड़ाना कोई खेल नहीं
    Nityanand Vajpayee
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    तुम्हारे बस में जो भी था वो तुमने कर दिया अब
    हमारे रस में विष भरना था तुमने भर दिया अब

    कभी बाज़ी हमारे हाथ आएगी तो बचना
    कि हमने भी उसी विष में डुबो नश्तर दिया अब
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    Nityanand Vajpayee
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    ग़ज़ब उगला है उसने ज़हर फिर इंसानियत कहकर
    बहुत हैरान हूँ मैं उसकी इस फिरक़ा-परस्ती से

    कई हिस्सों में अब उस मुल्क के कहने लगे हैं लोग
    हुए बर्बाद हैं हम ख़ुद की इस फ़िरक़ा-परस्ती से
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    Nityanand Vajpayee
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    जिस दिल के अँधेरों में उजाला नहीं गया
    उस से तो मेरा प्यार सँभाला नहीं गया

    धोया तो कई बार मसल कर के ख़ूब पर
    आँखों से तेरे चेहरे का जाला नहीं गया

    क़ोशिश तो बहुत की कि निकालूँ मैं खींच खाँच
    पर दिल से तेरा प्यार निकाला नहीं गया

    तूने तो मुझे गिफ़्ट में बदनामियाँ ही दीं
    पर मुझसे तेरा नाम उछाला नहीं गया

    साक़ी तू रहा जाने रिझाता किसे किसे
    इस जाम में तो बूँद भी डाला नहीं गया
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    Nityanand Vajpayee
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    शाइरी के इस समंदर में वही पहुँचेंगे बस
    आग के दरिया से जिनकी रूह है झुलसी हुई
    Nityanand Vajpayee
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    मरीज़-ए-इश्क़ हूँ दीदार-ए-यार काफ़ी है
    मिलेगा दीद से जो भी क़रार काफ़ी है
    Nityanand Vajpayee
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    बड़े गुस्ताख़ निकले तुम मेरी उम्मीद से ज़्यादा
    मेरी ही दी मशालों से मेरा ही घर जलाते हो
    Nityanand Vajpayee
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    तुम्हें पाकर मुकम्मल हो गई है ज़िंदगानी
    कोई ख़्वाहिश हमारे दिल में अब बाक़ी नहीं है
    Nityanand Vajpayee
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    टीस होती है उसे होने दो मुझको क्या है
    दर्द से मैंने भी दिल अपना दबाया था कभी
    Nityanand Vajpayee
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