कुछ दरिया के बीच में हैं तो कुछ थोड़े से किनारे हैं

पास से जब हम ने देखा तो सब के सब बेचारे हैं

उस से बेशक कुछ सीखोगे उस ने मैदाँ जीता है
हम से कुछ ज़्यादा सीखोगे हम मैदाँ में हारे हैं

तू बस तू है मैं बस मैं हूँ गर बाहरस देखें तो
लेकिन अंदर से देखें तो हम
में कितने सारे हैं

एक कहानी तेरी है और एक कहानी मेरी है
एक कहानी में हम दोनों घूम रहे बंजारे हैं

दुनिया अब उस पर हँसती है जिस को पूजा जाता था
आज वही मूरख हैं जो पहले के निश्छल न्यारे हैं

— Pushpendra Mishra

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