Pushpendra Mishra

Pushpendra Mishra

@ImPushpendraMishra

Pushpendra Mishra shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Pushpendra Mishra's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher(14)
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Sher

ज़िंदगी देती है मौका हर किसी को हम ने मौका दे दिया है ज़िंदगी को — Pushpendra Mishra
जिन का घर भी और उदर भी ख़ाली है उन सेे पूछो असल में क्या बदहाली है — Pushpendra Mishra
अपने एक हुनर से सब को भौंचक्का कर देता हूँ गूंगा होकर भी मैं तेरा नाम सही से लेता हूँ — Pushpendra Mishra
वही इक शे'र पढ़ कर याद आती थी मुझे उन की वही उस शे'र के चलते ग़ज़ल मैं ने जला डाली — Pushpendra Mishra
तुम ने जिस को चाहा है वो तो तुम को मिल जाएगी उस का बतलाओ क्या होगा जिस ने तुम को चाहा है — Pushpendra Mishra
इस दुनिया में कौन इजाज़त ले कर दुख देता है यार रस्ते के पत्थर को यूँँ ही मार दिया करते हैं लोग — Pushpendra Mishra
सब ने बोला था मिल कर खो जाओगे अच्छा तो तुम ही हो भूल भुलैया क्या — Pushpendra Mishra
मुकम्मल नज़्म तो ग़लती है मेरी मुझे बस नाम लिखना था तुम्हारा — Pushpendra Mishra
उठ जाओ अब बन्धू मेरे आख़िर किस दिन जागोगे भाग रहे हो मेहनत से मेहनत से कब तक भागोगे — Pushpendra Mishra
कहते हैं कैसे मुमकिन है पत्थर पानी पर तैरे कौन बताए कितने पत्थर तैराए हैं पानी पर — Pushpendra Mishra

Ghazal

Nazm

"पुख्त़गी" जो दिल में है दबी रखी सदा जहाँ तहाँ बता रहे हो तो अभी बड़े नहीं हुए हो तुम है बूँद बूँद आब कीमती कहीं भी गर बहा रहे हो तो अभी बड़े नहीं हुए हो तुम कहे सुने को सच समझ के जो गुहार गर लगा रहे हो तो अभी बड़े नहीं हुए हो तुम बिना किसी सबूत के उसे भला बुरा बना रहे हो तो अभी बड़े नहीं हुए हो तुम पवेलियन चले गए तो क्या पवेलियन से जा रहे हो तो अभी बड़े नहीं हुए हो तुम महज़ ये हुस्न देख के अगर किसी से दिल लगा रहे हो तो अभी बड़े नहीं हुए हो तुम झुके जो सर तो ठीक बात है कहीं भी सर झुका रहे हो तो अभी बड़े नहीं हुए हो तुम मुबारकाँ तुम्हें मिला है ग़म ख़ुशी नहीं मना रहे हो तो अभी बड़े नहीं हुए हो तुम हरेक बात को कहो नहीं हरेक बात गर बता रहे हो अभी बड़े नहीं हुए हो तुम फ़क़त सनम ही ज़िंदगी नहीं सनम सनम ही गा रहे हो तो अभी बड़े नहीं हुए हो तुम — Pushpendra Mishra