ऐसे घूमोगे जो अकेले में
गुम कहीं हो न जाओ मेले में
आए दिन ये किसान सुनता है
तोड़कर क्या मिलेगा ढेले में
तोतला एक मुझ से कहता है
बोलने की कमी है तेले में
लोग मुझ से ही बोलते क्यूँ हैं
तुम कहाँ पड़ गए झमेले में
जेब में है नहीं चवन्नी भी
और फिर आ गया हूँ मेले में
देख कर ज़िंदगी की गाड़ी को
ख़ूब हँसता हूँ मैं अकेले में
— Pushpendra Mishra















