सच कितना झुठलाएँगे
सब के सब मर जाएँगे
जी लें हम जो कह दो तुम
आएँगे हम आएँगे
जाने उस दिन क्या होगा
जिस दिन तुम को पाएँगे
झूठ कहा सपने में ना
अब हम एक हो जाएँगे
ठीक है ऐसे भी जीना
इक दिन तुम को पाएँगे
काश कि सारे मर जाएँ
जो भी तुम को भाएँगे
कह दो जो तुम मेरी हो
भँगड़ा पाले गाएँगे
तुम छोड़ो तो दुनिया बस
फिर हम भी आ जाएँगे
— Pushpendra Mishra















