बस एक मैं था जिससे सच मुच में दिलबरी की
वरना हर आदमी से उसने दो नंबरी की
जिस बात में भी हमने ख़ुद को अकेला रक्खा
बाग़ात में भी हमने जोड़ों की मुख़बरी की
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