उम्र यूँ ही तमाम होगी क्या
    मौत के बाद ही मिलोगी क्या

    तुम मेरा ख़्वाब ही रही अब तक
    तुम मेरा ख़्वाब ही रहोगी क्या

    आ गई हो तो चैन से बैठो
    ज़ेहन में घूमती फिरोगी क्या
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    Aditya Singh aadi
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    जो भी अच्छा भला आदमी है ख़ुदा
    बस उसी से तेरी दुश्मनी है ख़ुदा

    मानता हूँ तुझे क्या ये काफ़ी नहीं
    क्या तेरी बंदगी लाज़मी है ख़ुदा

    पहले जीता था मैं ज़िंदगी को मगर
    ज़िंदगी अब मुझे जी रही है ख़ुदा

    क्या सितम है कि मुझको पता भी नहीं
    किस ख़ता की सज़ा मिल रही है ख़ुदा

    अब दुआ है वो लड़की सलामत रहे
    जिसको अम्मा मेरी कोसती है ख़ुदा

    चाहता हूँ उसे मुझसे बेहतर मिले
    और वो भी यही चाहती है ख़ुदा
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    Aditya Singh aadi
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    कुछ ख़राबी रही मुहब्बत की
    और कुछ ख़ुद भी हम ख़राब हुए
    Aditya Singh aadi
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    ये मुलाक़ात आख़िरी क्यूँ हो
    शहर-ए-जानाँ से वापसी क्यूँ हो

    एक औरत को देखने के लिए
    इतना बैचैन आदमी क्यूँ हो

    जिससे ख़तरा नहीं मुहब्बत का
    ऐसी लड़की से दोस्ती क्यूँ हो

    मैं जो टोकूँ तो टोकती ही नहीं
    मैं न टोकूँ तो टोकती क्यूँ हो

    ख़ूब नोचा है ज़िंदगी ने मुझे
    इतनी आसान ख़ुदकुशी क्यूँ हो

    हम हैं मालिक उदास चेहरों के
    आइना देखकर ख़ुशी क्यूँ हो

    तेरी चौखट पे जब अँधेरा है
    मेरे कमरे में रौशनी क्यूँ हो

    कर दिए दफ़्न पैरहन उसके
    जो नहीं साँप केंचुली क्यूँ हो

    जब सलीक़ा न हो बजाने का
    हाथ मोहन के बाँसुरी क्यूँ हो

    जब कोई काम ही नहीं मुझसे
    मेरे बारे में सोचती क्यूँ हो

    आ गए पास जब समंदर के
    फिर किनारे से वापसी क्यूँ हो
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    Aditya Singh aadi
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    मुझको मेहबूब दीजियो ऐसा
    जिसके होने पे लाख़ लानत हो
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    ख़बर मौत की क्या ख़बर है
    कहीं इश्क़ हो तो बताओ
    Aditya Singh aadi
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    हाल मजनूँ सा बनाओ जाओ
    दश्त में ख़ाक उड़ाओ जाओ

    मरहमों को ये इजाज़त दी है
    ज़ख़्म का हाथ बटाओ जाओ

    घर कहीं और बसा लो लेकिन
    दिल तुम्हारा ही है आओ जाओ

    अब मिरी लाश में क्या रक्खा है
    ख़ाक में ख़ाक मिलाओ जाओ

    वक़्त बर्बाद हुआ जाता है
    काम की बात बताओ जाओ

    मुझको बर्बाद बताने वालों
    अपनी औलाद बचाओ जाओ

    खिड़कियाँ याद किया करती हैं
    घर तुम्हारा है तो आओ जाओ

    मै कहीं और लगा लूँगा दिल
    तुम कहीं और लगाओ जाओ
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    Aditya Singh aadi
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    आसमानों से हमारा जब तलक नाता रहा
    हर सितारा दोस्त था हर चाँद घर आता रहा

    कैसे तुझको मान लूँ मैं दोस्त अपना ऐ सनम
    मैं जिसे खोता रहा हूँ तू उसे पाता रहा

    ख़ुद पे गुज़रे हादसों का ज़िक्र तक छेड़ा नहीं
    जाने किसका गीत था जो उम्र भर गाता रहा
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    Aditya Singh aadi
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    रास आ ही गई हथकड़ी हाथ की
    तोड़ कर फेंक दी है घड़ी हाथ की
    Aditya Singh aadi
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    चढ़ गया है नशा शेर सुनना
    गर कहा है सुना शेर सुनना

    आज मुझको रुलाया है उसने
    आप कल का मिरा शेर सुनना

    गालियाँ दे रही थी मुझे वो
    मैंने हँस कर कहा शेर सुनना

    मैं अभी तक तुम्हें चीख़ता हूँ
    सुन सको गर सदा शेर सुनना

    जा रहा हूँ कभी फिर मिलेंगे
    दोस्तों अलविदा शेर सुनना
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    Aditya Singh aadi
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