उम्र यूँँ ही तमाम होगी क्या
मौत के बा'द ही मिलोगी क्या
तुम मेरा ख़्वाब ही रही अब तक
तुम मेरा ख़्वाब ही रहोगी क्या
आ गई हो तो चैन से बैठो
ज़ेहन में घूमती फिरोगी क्या
— Aditya Singh aadi
मौत के बा'द ही मिलोगी क्या
तुम मेरा ख़्वाब ही रही अब तक
तुम मेरा ख़्वाब ही रहोगी क्या
आ गई हो तो चैन से बैठो
ज़ेहन में घूमती फिरोगी क्या
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling