Aditya Singh aadi

Aditya Singh aadi

@Aditya_Singh_aadi

Aditya Singh aadi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aditya Singh aadi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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Sher

कुछ ख़राबी रही मुहब्बत की और कुछ ख़ुद भी हम ख़राब हुए — Aditya Singh aadi
ख़बर मौत की क्या ख़बर है कहीं इश्क़ हो तो बताओ — Aditya Singh aadi
मुझ को मेहबूब दीजियो ऐसा जिस के होने पे लाख़ लानत हो — Aditya Singh aadi
रास आ ही गई हथकड़ी हाथ की तोड़ कर फेंक दी है घड़ी हाथ की — Aditya Singh aadi

Ghazal

इन्हें पाला है अपनी बोटियों पर मेरे एहसान हैं तन्हाइयों पर फलों से जब तलक रिश्ता रखेंगे सितम होता रहेगा डालियों पर तमन्ना भी है दिल में ख़ुद-कुशी की भरोसा भी नहीं है भाइयों पर हमेशा बेड़ियों का ज़िक्र करना कभी जब शे'र कहना चूड़ियों पर तुम्हें राहत मिलेगी हिचकियों से नज़र फेरो हमारी चिट्ठियों पर निकल जाऊँगा इक लंबे सफ़र को मैं अपना नाम लिख कर पटरियों पर बहुत दूर आ गए उन की गली से नज़र अबतक टिकी है खिड़कियों पर मेरी तलवार पैनी कर रहा है तेरा हँसना मेरी कमज़ोरियों पर निशानी मिट गई ज़ख़्मों की लेकिन लहू के दाग़ तो हैं पट्टियों पर — Aditya Singh aadi
वो जो मालिक हैं सभी के वो शिफ़ा देंगे तुम्हें इन दु'आओं के सिवा दूर से क्या देंगे तुम्हें जब भी चाहेंगे बहा लेंगे ज़रा से आँसू जब भी चाहेंगे निगाहों से गिरा देंगे तुम्हें क्या सितम है वही इक रोज़ नहीं आता है सोचते रोज़ हैं इक रोज़ भुला देंगे तुम्हें गाँव की सड़कें बता देंगी हमारी हालत सूखते पेड़ इशारों से पता देंगे तुम्हें हम जो चाहें वो ख़ुदा ही हमें दे सकता है तुम जो चाहोगे वो मांँ बाप दिला देंगे तुम्हें लोग जो मिलते हैं हँसता हुआ चेहरा ले कर इन से बचना कि यही लोग रुला देंगे तुम्हें — Aditya Singh aadi
वो मेरे ख़्वाब की लड़की जो गुम-शुदा है कहीं उसी की खोज में ये दिल भी लापता है कहीं ख़ुदा के वास्ते मत कीजिए ख़ुदा की बात कई दिनों से कहीं मैं हूँ और ख़ुदा है कहीं मुझे ये डर है निशाने पे दिल न हो उस का कि मेरा तीर अँधेरे में जा लगा है कहीं न जाने कब वो उठाएगा और तराशेगा मेरे नसीब का पत्थर पड़ा हुआ है कहीं जो बात बात पे कहता था गाँव जन्नत है ख़बर मिली है वो अब शहर में बसा है कहीं तेरे सभी सर-ओ-सामान से ये लगता है तू इस मकान से पहले भी रह चुका है कहीं इसी फ़िराक़ में हर शख़्स हो गया आदी कि आशिक़ी से भी बढ़कर कोई नशा है कहीं — Aditya Singh aadi
तेरा ज़िक्र इस लिए भी किया नए आशिक़ों को पता लगे तेरी बात उतनी बुरी नहीं तेरी बात कर के बुरा लगे मेरे दोस्तों मेरे दुश्मनों जो भी दिल में है वो निकाल लो मुझे इश्क़ ने वो बना दिया जिसे बद-दुआ भी दुआ लगे मैं ये कहना तो नहीं चाहता मगर आज भी मेरी चाह है कोई हादसा मुझे ढूंँढ ले कोई तीर सीने में आ लगे तुझे देख क्या लिया इक नज़र तुझे क्या लगा मुझे प्यार है नई लड़कियों सा ये दिल नहीं जो कहीं किसी से भी जा लगे मेरी बद-दुआ है ओ बे-वफ़ा तेरा हुस्न इतना अज़ीम हो तुझे दोस्तों की नज़र लगे तुझे दुश्मनों की दवा लगे मैं पला हूँ ऐसे मकान में जहाँँ क़ाएदे भी क़फ़स के हों जहाँँ ज़हर लगती हों रोटियांँ जहाँँ सांँस लेना सज़ा लगे मुझे मंदिरों से ग़िला नहीं न ही मस्जिदों से ख़फ़ा हूँ मैं मुझे उस ख़ुदा की तलाश है जो कि वाक़ई में ख़ुदा लगे — Aditya Singh aadi
ख़्वाहिश है एक रोज़ तेरी ख़ूबियाँ गिनूँ दरिया में आँखें डाल के मैं मछलियाँ गिनूँ ढलती हुई ये शाम है हाथों में तेरा हाथ अब शा'इरी करूँँ कि तेरी चूड़ियाँ गिनूँ शामिल हो मेरी याद में लोगों की एक भीड़ तन्हा कहीं पे बैठ के मैं हिचकियाँ गिनूँ आया हूँ जब से गाँव इसी सोच में हूँ मैं माँ के सफ़ेद बाल या फिर छुट्टियाँ गिनूँ तू ही बता दे यार मैं काग़ज़ के ढेर में अपनी शिकायतें या तेरी चिट्ठियाँ गिनूँ सोचा है तुझ को शक़्ल दूँ ऊँचे मकान की चढ़ते उतरते रोज़ तेरी सीढ़ियाँ गिनूँ मैं चाहता हूँ तुझ पे कोई फल लगे कभी ऐ पेड़ कब तलक मैं तेरी पत्तियाँ गिनूँ — Aditya Singh aadi

Nazm

गर्दन मेरे तकिए के नीचे चाक़ू है कुछ बुरे ख़्वाब मुझ को आते हैं एक माला है मेरी गर्दन में जो कि गर्दन से लाज़िमी है मुझे जैसे साधु की कोई कंठी हो जैसे तावीज़ हो नज़र वाला हो सुहागन का जैसे मंगल सूत्र जैसे दूल्हे की हो ये वरमाला माँ की मन्नत का कोई धागा हो जैसे पापा का कोई तोहफ़ा हो जैसे ऑफ़िस का आई कार्ड ही हो कुकुरों के गले का पट्टा हो जिस सेे उकता गया है मन मेरा मेरा मन है उतार फेंकू इसे पर ये सोने की कोई चेन नहीं चार दिन में उतार दूँ जिस को ये कभी भी उतर नहीं सकती तब तलक जब तलक ये गर्दन है गर उतारा तो पाप लगता है इस का मतलब ये कोई माला नहीं ये तो फांँसी का एक फंदा है जो कि गर्दन में फंँस गया है मेरी जैसे इक रिंच बोल्ट कसती है ऐसे गर्दन को कस रहा है मेरी अपनी गर्दन मुझे बचानी है सो मैं चाक़ू निकाल लेता हूँ मेरी माला नहीं उतरती है और मैं गर्दन उतार लेता हूँ — Aditya Singh aadi