ख़ुशियांँ हैं एक घर में तो इक घर उदास है
ससुराल मेरा ख़ुश है तो पीहर उदास है
उस की तो प्यास बुझ रही है बारिशों से दोस्त
धरती को क्या ख़बर है कि अंबर उदास है
ऐसा नहीं कि तुम से बिछड़ने का दुख हुआ
दिल तो बस अपने आप को खो कर उदास है
मैं ने भी कह दिया है कि रहने दो उम्र भर
तकिए बता रहे थे कि बिस्तर उदास है
सिर्फ़ एक मैं नहीं जो अकेला उदास हूँ
जिस जिस को है वो शख़्स मुयस्सर उदास है
— Aditya Singh aadi














